भारत में 20 साल बाद ट्रायथलन एशिया कप, 30 विदेशी समेत 100 एथलीट शामिल होंगे

भारत में 20 साल बाद ट्रायथलन एशिया कप होने जा रहा है। यह रविवार सुबह से शुरू हो जाएगा।भारतीय ट्रायथलन फेडरेशन (आईटीएफ) के तहत तमिलनाडु ट्रायथलन एसोसिएशन इस इवेंट का आयोजन कर रहा है। इसमें फ्रांस, सर्बिया, जापान, चिली, स्विट्जरलैंड, पोलेंड, नेपाल और यूक्रेन समेत अन्य देशों के 30 ट्रायथलीट शामिल होंगे, जबकि भारत के 70 से ज्यादा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।


ट्रायथलन में तीन खेल (साइकिलिंग, तैराकी और दौड़) शामिल




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    ट्रायथलन में तीन खेल (साइकिलिंग, तैराकी और दौड़) शामिल होते हैं। इसमें 1.5 किलोमीटर तैराकी, 40 किलोमीटर साइकिलिंग और 10 किलोमीटर की दौड़ होती है। यह इवेंट सबसे पहले 1989 में फ्रांस के एविग्नन में हुआ था।


     




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    ट्रायथलन को 1994 में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (आईओसी) ने मान्यता दी। इसके बाद साल 2000 के सिडनी ओलिंपिक में पहली बार इसे शामिल किया गया। इस इवेंट को कॉमनवेल्थ गेम्स में 2002 में शामिल किया गया था। तब यह गेम्स ब्रिटेन के मैनचेस्टर में हुए थे।


     




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    आईटीएफ के सीईओ एन रामचंद्रन ने कहा, ‘‘ट्रायथलन के साथ सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप भी होगी। दोनों ही इवेंट में 70 से ज्यादा भारतीय एथलीट शामिल रहेंगे। एथलीट के पास एक साथ दो पदक जीतने का सुनहरा मौका है।’’


     




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    यह ट्रायथलन हर साल किसी न किसी देश में आयोजित होती है। इसमें महिला, पुरुष और जूनियर समेत कई वर्ग में इवेंट होते हैं। इसके अलावा आयरनमैन और दुनिया की सबसे कठिन रेस एंडुरोमन ट्रायथलन भी होती है। एंडुरोमन में 140 किमी दौड़, 33.8 किमी तैराकी और 289.7 किमी साइकिलिंग करनी होती है। तैराकी में ब्रिटेन का इंग्लिश चैनल पार करना होता है।


     




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    सितंबर 2019 में हुई एंडुरोमन ट्रायथलन भारतीय एथलीट मयंक वैद ने रिकॉर्ड समय 50 घंटे 24 मिनट में जीती थी। उन्होंने पिछले वर्ल्ड रिकॉर्ड को 2 घंटे 6 मिनट के बड़े अंतर से तोड़ा। इससे पहले बेल्जियम के जूलियन डेनेयर ने 52 घंटे 30 मिनट में यह रेस जीती थी। मयंक यह रेस जीतने वाले एशिया के पहले और दुनिया के 44वें एथलीट हैं।


     




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    एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में मंयक ने कहा था, ‘‘यह दुनिया की सबसे पॉइंट टू पॉइंट ट्रायथलन रेस है। दुनिया में अब तक इसे सिर्फ 44 लोग ही इसे जीत सके हैं। इससे ज्यादा लोग माउंट एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। यह वास्तव में दुनिया की सबसे कठिन और क्रूर ट्रायथलन है।’’